❤️ माँ ❤️

जब आँख खुली तो अम्मा का गोद बस एक सहारा था…
उसका नन्हा सा आंचल मुझको भूमंडल से प्यारा था…
उसके चहरे की झलक देख चेहरा फूलों सा खिलता था… उसके अस्तन के एक बूंद से मुझको जीवन मिलता था ।।

हांथों से बलों को नोचा…
पैरों से खूब प्रहार किया…
फिर भी माँ ने पूचकारा…
हमको जी भर के प्यार किया ।।

मै उसका नन्हा बेटा था…
वो आँख का तारा कहती थी…
मै बनूँ बुढ़ापे का बस एक सहारा कहती थी ।।

उँगली को पकड़ चलाया…
पढ़ने विद्यालय भेजा था…
मेरी नादानी को भी निज अन्तर मे सदा सहेजा था…
मेरे सारे प्रश्नो की वो फौरन जबाब बन जाती थी..
मेरे राहों के कांटों की वो खुद गुलाब बन जाती थी।

हम बड़े हुए तो रोग प्यार का ले आए…
जिस दिल मे माँ की सूरत थी वो रमकली को दे आए…
शादी की, पति से बाप बने…
अब रिश्तों मे घुल गए…
अब करवाचौथ मानते हैं, माँ की ममता को भूल गए

हम भूल गए…
खुद भूखी रहकर वो हमको खिलती थी…
हमको सूखा बिस्तर दे कर खुद गिले पर सो जाती थी
हम भूल गए…
उसने ही होंठो को भाषा सिखाई थी..
मेरे नींद के लिए उसने लोरी सुनाई थी,
हम भूल गए…
गलती पर उसने डांट समझाया था…
बच जाए बुरी नजरों से इसलिए कला टीका लगाया था ।।

हम बड़े हुए तो ममता वाले रिश्ते तोड़ दिए…
घर मे कुत्ते पालकर माँ को विर्धाआश्रम छोड़ आए
उसके सपनों का महल गिराकर कंकड़-कंकड बिन लिए…
ख़ुदगर्जी की, उसके सागर के आभूषण को छीन लिए ।।

हम माँ को घर के बँटवारे की अभिलाषा तक ले आए
उसके पावन मंदिर से गाली की भाषा तक ले आए…
माँ की ममता देख मौत भी सामने से हट जाती है.
जब माँ अपमानित होती है धरती की छाती फ़ट जाती है…
घर को पूरा जीवन देकर बेचारी माँ क्या पाती है…
रूखा-सूखा खा कर पानी पी सो जाती है ।।

जो माँ जैसी देवी को घर जैसे मंदिर मे नहीं रख सकते हैं…
लाख पुण्य करे कोई इंसान नहीं बन सकते है…
माँ जिसमे भी पानी देदे, वो पौधा समदल बन जाता है
माँ के चरणों को छू कर पानी भी गंगाजल बन जाता है ।।

माँ के आंचल ने युगों-युगों से भगवानों को पाला है…
माँ के चरणों मे जन्नत है, गिरजाघर और शिवाला है…
हिमगिरि जैसा ऊँचाई है…
सागर की गहराई है…
दुनिया मे जितनी भी खुशी है माँ के चरणों से आई है

माँ आँगन की तुलसी जैसी,
बरगद की पावन छाया है…
माँ वेद-रिचाओं की गरिमा,
माँ काव्यों की काया है…
माँ मानसरोवर की ममता,
गौमुख की ऊँचाई है…
माँ नदियों का संगम है…
माँ हमारी परछाई है ।।

तीनों लोक नर्तन करते जब माँ लोरी गाती है…
माँ जिस चीज की छू दे वो प्रसाद बन जाती है…
माँ हँसती है तो धरती का जरज़रा तक मुस्कुराता है…
देखो तो दूर तक, ये अम्बर भी धरती को शीश झुकाता है ।।

अम्मा तेरी बात हर वरदान से बढ़कर लगती है…
माँ तेरी सूरत मुझको भगवान् से बढ़कर लगती है।

सारे तीर्थ का पुण्य यहाँ…
मै उन चरणों मे लेटा हूँ…
जिनके कोई सन्तान नहीं…
उन माँओं का मै बेटा हूँ…
हर घर मे माँ की पूजा हो ऐसा संकल्प उठाता हूँ…
मै दुनिया के हर माँ के चरणों मे शीश झुकाता हूँ…

Happy Mothers Day To All The Lovely Mothers Of This World

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

अंजान मुसाफ़िर…❤️

आज फिर मिल गया
वो अंजान मुसाफ़िर मुझे,
लगता है आज फिर था इंतज़ार में मेरे।

एक बार फिर वक्त कि किताब से
कुछ पन्ने हमने चुराए,
सोचा अपनो की तो कई बार सुनी है,
आज इसके लव्ज़ो में खो जाए।
कुछ उसकी सुने, कुछ अपनी सुनाए
क्यूँ ना आज उस गैर के हो जाएँ!

नजाने क्यूँ उसमें अपनी परछाई-सी
नज़र आ रही है,
लग रहा है मानो हवाएँ भी मुझसे ही इश्क फ़र्मा रही हैं।

कुछ उलझे हुए से धागे, सुलझते नज़र आ रहे हैं,
संगीत के हर राग शायद मुझसे ही बतिया रहे हैं।
धूल से लिपटी वो चादर सिमट रही है,
जिस शख़्स को बरसो पहले कही छोड़ दिया था
वापिस मेरे चौखट को लौट रही है।

ज़िन्दगी के जिस अंजान सफ़र में
अपनेआप को छोड़; यूँ आगे था मैं निकल आई,
वक्त से कुछ मौहलत लेकर शायद ज़िन्दगी
ख़ुदको आज मुझे लौटाने है आई।

शायद खो गई था मैं कहीं
इस सांसारिक भीड़-भाड़ में,
मिला दिया ख़ुद से मुझे उसने
सफ़र के मध्य भाग में।

सोचा जब इतने किस्से हमने
इस गैर को है सुनाया
क्यूँ ना आज इस से पूछ ही लें
अपना क्या नाम इसने बताया!
काँच के उस टुकड़े से इठलाती हुई आवाज़ आई
क्या कभी आइने ने अपनी राज़ है बताई!

Writen by – Rashi Srivastava Instagram – @rashi.a.srivastava
📍 New Delhi

SHE👧

Dancing to her feets,
singing the songs
her heart beats.

She stretches her arms
for the wings to let her fly.
Her mind is a garden
she nurtures in which;
beautiful flowers giving
vibrant shades to the sky.

Imperfect we all know
but she can feel.
She has embraced
all her flaws and never
would she kneel.

She carries her scars like
admirable courage marks
and never would she let it
push her into the dark.

She admits of pain
she has been through all along,
and never does she hide
her true self to which
she would belong.

Acid flung at her face
carving deforming contours,
stripped identity, burned
her inside out.
Yet inspite of all this
she keeps rising again,
she would always bloom
and sprout.
Cause she is daring enough
not to let those monsters feed
on her dream,
and tread up her way
all unaccompanied.

Poet – Rashi Srivastava
📍 New Delhi
Insta @rashi.a.srivastava

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ये दिल तोड़ता कौन हैं?

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

कभी इस ज़माने से तो कभी खुद से ही लड़े है।
कुछ टूट कर बिखर गए…
कुछ झूठी हँसी का लिबास ओढ़े आगे बढ़े हैं…
कई निकल गए नई मोहब्बत के तलाश मे…
कई पुरानों मे ही उलझे पड़े हैं….
पर अगर सब गिरे है ज़ख्मी यहाँ…
तो ज़ख्म देने वाले कहाँ खड़े हैं…
आखिर ये दिल तोड़ता कौन है…
यहाँ तो सब टूटे पड़े हैं…
कमरों में अकेले किसी ना किसी से रूठे पड़े हैं
चारो ओर देखो तो हर कदम पर आशिक पड़े हैं
कुछ छोड़ चुके हैं अब…
तो कुछ अब तक जिद्द पर अड़े हैं…
ये दिल तोड़ता कौन है…
यहाँ तो सब टूटे पड़े हैं…

🙂 🙂 🙂 🙂 🙂 🙂 🙂 🙂 🙂 🙂

हम चुप रह नहीं सकते…🙏

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प्रथम पद पर वतन ना हो तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
किसी शव पर कफ़न ना हो तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
भले सत्ता को कोई भी सलामी दे न दे लकिन
शहीदों को नमन ना हो तो हम चुप रह नहीं सकते…✊

जले कश्मीर की वादी तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
अराजक हो अगर खादी तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
भले शिशुपाल के 99 अपराध सहते हों…
मगर संसद हो अपराधी तो हम चुप रह नहीं सकते…✊

फसल पानी को तरसेगी तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
फक्त दिल्ली ही जलेगी तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
मिटा कर गाँव की हस्ती अगर शासन-प्रशासन की…
कृपा महलों में बरसेगी तो हम चुप रह नहीं सकते…✊

कलम के जिस्म भी चुप हों तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
कला की किस्म भी चुप हो तो हम चुप रह नहीं सकते…✊
भले दरबार मे लज्जा उघारी जा रही घर की…
पितामह भीष्म भी चुप हो तो हम चुप रह नहीं सकते… ✊

#नया भारत K.V.
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If there is no homeland in the first position, then we cannot remain silent.
If there is no shroud on any dead body, we cannot remain silent…
No one can salute the power, but
If the martyrs do not bow down, we cannot remain silent…

If we are a litigant, we cannot remain silent …
If Khadi is chaotic then we cannot remain silent …
Even though Shishupala has 99 crimes …
But if we are criminals, we cannot remain silent …

We cannot remain silent if the crop yearns for water …
If Delhi alone burns then we cannot remain silent …
Eradicate the village if the governance and administration …
If grace will rain in the palaces, then we cannot remain silent …

If the pen body is silent, then we cannot remain silent.
If the art type is too silent, we cannot remain silent.
In the court of the house, shame is being raised
If Bhishma too is silent then we cannot remain silent.

#NEW INDIA 🇮🇳        K.V.

पापा मैंने सीखा है आपसे.. ❤️

पापा मैंने बहुत कुछ सीखा है आपसे…🙂❤️

जब दिन भर के मेहनत के बाद कुछ हांथ न आया हो तो खुद पैदल चल के किराये वाले पैसों से बच्चों के लिए कुछ लाया कैसे जाता है…
मैंने सीखा है आपसे।🙂

सब अपनापन जताते हैं हमारे दर्द मे आंसू बहा कर या हमे गले से लगा कर …
पर एक मजबूत कंधा बन के अपने आंसुओं को छुपाया कैसे जाता है…
मैंने सीखा है आपसे।🙂

जिस बेटे के पहली बार बोलने पे आपने मिठाईयां बांटी हो…
वही बेटा बड़ा हो कर आपकी बात काटते हैं  तो उसकी बात को हँस के कैसे टाला जाता है… 
मैंने सीखा है आपसे।🙂

जब सब कुछ बिखर गया हो…
समेटने को कुछ भी ना हो…
ऐसे वक़्त मे परिवार को कैसे सम्भाला जाता है…
मैंने सीखा है आपसे।🙂

अपने अरमानो का गला घोट के अपने बच्चों के सपनों को पाला कैसे जाता है…
मैंने सीखा है आपसे।🙂

सच कहा है किसी शायर ने… ❤️

आवाज़ और बिना आंसू के जो रोता है वो बाप है…
जो अपने बच्चों के तकलीफ़ों के छेदों को अपने बनियान मे पहन लेता है वो बाप होता है… ❤️

ये सच है कि 9 महीने पालती है हमे माँ पेट मे…
पर 9 महीने जो दिमाग मे ढोता है वो बाप होता है… 🙂

LOVE YOU PAPA… 😘

Father, I have learned a lot from you .❤️

When some hands have not come after a day’s hard work, then how to bring something for the children from the rental money itself.
I learned from you.

Everyone expresses our tears by shedding tears or by hugging us …
But how to hide your tears by becoming a strong shoulder …
I learned from you.

The son of whom you have distributed sweets for the first time …
If the same son grows up and bites you, then how can his words be avoided by laughing…
I learned from you.

When everything is shattered …
There is nothing to crush …
How is the family handled at such a time…
I learned from you.

How do you put the dreams of your children in the arms of your eyes…
I learned from you.

Truth is told by a poet…❤️❤️

The one who cries without voice and without tears is the father …
The one who wears the wounds of the troubles of his children in his vest is the father …❤️

It is true that 9 months raise us in our mother’s stomach …
But the 9 months that covers my mind is the father…❤️

कोई बात नहीं ❤️ 🙂

माना कि अब हम साथ नहीं…
मगर दिल ❤️ से एक बात कहूँ…
“कोई बात नहीं”।

लेकिन आज भी हर रात सोने से पहले…
तेरी यादों के समुन्दर मे एक लम्म्म्म्बी साँस लेकर गोता मारने चला जाता हूँ…
और उन पुराने लम्हों मे से किसी एक लम्हे को निकाल लाता हूँ…
फिर उसे आँखें बंद कर तब तक निहारता हूँ जब तक नींद नहीं आ जाती..
और अगली सुबह से यही इंतजार कारता हूँ कि कब ये दिन ढले और कब रात हो…
कब फिर तुझे आवाज लगाऊँ और कब तुझसे बात हो..

माना कि अब वो रात नहीं…
मगर दिल ❤️ से एक बात कहूँ…
“कोई बात नहीं”।

लोग कोसते है अपनी मोहब्बत को…
कि उसने उनको तबाह कर दिया…
लेकिन मै तो तेरा शुक्रगुजार हूँ…
कि जितना बनता था तूने अपना फर्ज अदा कर दिया…
और वैसे भी रिस्तों की उम्र नहीं देखी जाती…
देखी जाती है तो सिर्फ एक बात…
“कि उन रिस्तों मे हम कितना जिएं”…
और सच कहूँ तो आज समझ आता है…
कि मैंने उस वक़्त मे पूरी एक जिंदगी जी ली…
जिनकी यादें अब अकेले रहने के लिए भी काफ़ी है…

माना की अब मेरे हाथ तेरे हाथ नहीं…
मगर दिल ❤️ से एक बात कहूँ…
“कोई बात नहीं”।

शायद मेरी आवाज़ अब तुझ तक पहुँचती नहीं…
शायद तेरी निगाहें भी अब मुझको खोजती नहीं…
शायद ये कहानी अब अंजाम के परवाना चढ चुकी है…
क्यूंकि शायद मुझे भूल कर तू आगे बढ़ चुकी है…
मगर बेफिक्र होके जा…
क्यूंकि मामला ये तेरे सुकूं का है…
मेरे जिस्म की परवाह न कर…
मेरा रिश्ता तो तुझसे रूह का है…

माना की मेरे लिए तेरे वो जज्बात नहीं…
मगर दिल ❤️ से कह रहा हूँ मेरी जान…
“कोई बात नहीं”।